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रोज़ तड़प्ते है हम

यह कैसी जुदाई है

जब भी तेरी याद आई

बारबार ज़िंदगी को

किसी दर्द को संभाल

जी तो चाहता है

बरस जाती है

यूँ तो सदमो मे भी

तेरी याद मे ज़रा

क्या नशा है इश्क़

सोना चाहता हूँ पर

निकल आते है

प्यार टूटा तो