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तरस गए आपके दिदार को

हर मुलाकात को याद हम करतें हैं

मेरी आखों में

खोई हुई आँखो में

उनके दीदार के लिए

जब गुलाब कहीं पे खिलता है

प्यार और मौत से

इतना ऐतबार तो

आदते इश्क

कितना इश्क़ है

रखा करो नजदीकीयाँ