हर एक मुलाकात

हर एक मुलाकात पर वक़्त का तक़ाज़ा हुआ,
जब से उसे देखा दिल का दर्द ताज़ा हुआ,
सुनी थी सिर्फ़ गाज़ल में जुदाई की बातें,
आज खुद पर बीती तो हक़ीक़त का अंदाज़ा हुआ.

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