गम इस कदर बरस May 27, 2016 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps गम इस कदर बरस पड़े, सावन भी शर्मशार होइस हिज़र मे दो आँखों की कुद्रत से तक़रार होहर सिलसिला रुका रहे, हर ज़लज़ला बुझा रहेठहरी अंधेरी रात मे खामोशी की झंकार हो . Comments
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