मेरे ज़ख़्मों पे

मेरे ख़ामोश होंठों को हँसाने कौन आया है
मेरी वीरान दुनिया को सजाने कौन आया है
अभी तक जो मिला इक दर्द ही देकर गया मुझको
मेरे ज़ख़्मों पे अब मरहम लगाने कौन आया है!!

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