आख़िर कहे क्या

आख़िर कहे क्या अब तो कुच्छ कहा नही जाता;
जब भी दर्द मिलता हैं तो सहा नही जाता;
आपसे प्यार हो गया हेई अब इस क़दर;
की बिन आपको देखे हुंसे रहा नही जाता!

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