आज भीगी हे पलके

आज भीगी हे पलके एक फरियाद मे,
आश्क भी सिमट गया हे अपने आप मे,
ऊस की बूंदे ऐसे बिखरी पत्तो पर,
मानो चाँद भी रोया हो किसी की याद मे.हर तरफ खामोशी का साया है,

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