बेचैनियां मेरी

बताओ फ़िर' उसे क्यूँ नहीँ मेहसूस होती बेचैनियां मेरी,
जो अक्सर केह्ती है , "बहुत अच्छे से जानती हूँ मैँ तुम्हेँ
"

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