पहली मुलाक़ात


कभी तो मिले पहली मुलाक़ात की तेरहा
बिगरा ही रहता है क्यूँ हालात की तेरहा
वो एक सनम जो लगे जान से प्यारा
मुझे वक़्त तो देता है मगर खेरात की तरहा

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