ऐसा मेरे साथ ही क्यों हुआ ?
सोचते हैं जब भी हम, हो जाती हैं आखे नम,
कितना चाहा था तुझे, लेकिन कर ना सके मजबूत इरादा,
इस गम-ए-जुदाई को सहने का.
कर दिया मुझे इतना जुदा एक पल में ही,
देकर उम्र बहर का गम.
माना की हुई हैं गुस्ताखी हमसे,
क्या यही सजा मुक्कमल करनी जरूरी थी। तू किसी और की हो गई, मुझसे नाता तोड़ कर।।
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